बिलासपुर :- मोपका-लगरा स्थित एक आलीशान होटल में आयोजित इंटक के 46वें अधिवेशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। खुद को मजदूरों का हितैषी बताने वाले नेता जहां एक ओर गरीब और श्रमिक वर्ग की समस्याओं की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर महंगे लाउंज में बैठक और भव्य भोजन व्यवस्था ने उनके दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, अधिवेशन के दौरान नेताओं के लिए विशेष तौर पर महंगे लाउंज में बैठक के साथ-साथ आलीशान खानपान की व्यवस्था की गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जो संगठन खुद को मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने वाला बताता है, वह इस तरह के खर्चीले आयोजनों के जरिए किस तरह अपनी सादगी और प्रतिबद्धता साबित कर पाएगा।

इतना ही नहीं, इस अधिवेशन के दौरान केंद्र सरकार की श्रम सुधार योजनाओं को लेकर भी मंच से आलोचना की गई। जबकि केंद्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को 4 लेबर कोड में समाहित करने का उद्देश्य श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, बेहतर वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल देना बताया जा रहा है।इसके बावजूद नेताओं द्वारा इन योजनाओं को लेकर भ्रम फैलाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं।बैठक में शामिल नेताओं ने इसे काला दिवस बताते हुए नए श्रम कानूनों का विरोध किया और दावा किया कि इनसे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे।

हालांकि आलोचकों का कहना है कि एक ओर संगठन खुद को मजदूरों के लिए समर्पित बताता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे भव्य आयोजनों से उसकी मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है।फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने इंटक की कार्यप्रणाली और उसकी प्राथमिकताओं पर बहस छेड़ दी है। मजदूरों के नाम पर राजनीति और वास्तविक जमीनी काम के बीच का फर्क अब खुलकर सामने आने लगा है, जिससे संगठन की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।
