छत्तीसगढ़ के चर्चित फॉर्च्यून एलिमेंट्स आवासीय प्रोजेक्ट विवाद में हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश जारी करते हुए मामले की जांच 60 दिनों के भीतर पूरी कर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। प्रोजेक्ट के 15 प्रतिशत हिस्सेदार मयंक अग्रवाल ने लेआउट उल्लंघन, अवैध निर्माण, उनकी सहमति के बिना संपत्तियां गिरवी रखकर 100 करोड़ रुपये का ऋण लेने और हस्ताक्षरों की जालसाजी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हाईकोर्ट ने मयंक अग्रवाल को सात दिनों के भीतर सभी भागीदारों को पक्षकार बनाकर नई शिकायत प्रस्तुत करने को कहा है। वहीं, कमर्शियल कोर्ट ने भी बिल्डरों को राहत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि किसी भी व्यक्ति को सरकारी विभागों और बैंकों में शिकायत करने से नहीं रोका जा सकता। अदालत के इस फैसले के बाद अब नगर परिषद बोदरी और संबंधित विभागों की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो कॉलोनाइजर नियमों के तहत संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

