बिलासपुर – बिलासपुर केंद्रीय जेल के भीतर हुई एक सनसनीखेज हत्या ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। उम्रकैद की सजा काट रहे एक बंदी ने दूसरे कैदी की पत्थर से हमला कर हत्या कर दी। हाई सिक्योरिटी मानी जाने वाली जेल के अंदर हुई इस वारदात ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के मुताबिक मुंगेली के चमारी निवासी राजेश रॉय, जो हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है, ने जेल परिसर में मौजूद नाली के पत्थर से कोटा निवासी नीलू जगत पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर चोटों से लहूलुहान नीलू जमीन पर गिरकर तड़पता रहा और आसपास मौजूद बंदियों में भी दहशत फैल गई।घटना की सूचना मिलने पर जेल प्रहरी मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल नीलू को तत्काल सिम्स अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी राजेश रॉय और मृतक नीलू जगत दोनों मानसिक रोग से पीड़ित थे तथा उनका इलाज भी जेल के भीतर चल रहा था।

ऐसे में यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि विशेष निगरानी में रखे जाने वाले बंदियों के बीच इतनी बड़ी वारदात आखिर कैसे हो गई।सबसे बड़ा सवाल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। जिस केंद्रीय जेल को संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाला परिसर माना जाता है, वहां नाली का पत्थर हत्या का हथियार बन गया। आखिर जेल के अंदर ऐसी स्थिति कैसे बनी कि एक बंदी दूसरे बंदी की जान ले ले और सुरक्षा व्यवस्था को इसकी भनक तक न लगे। यह घटना जेल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सीधे तौर पर सवाल खड़े कर रही है।बिलासपुर केंद्रीय जेल पहले भी कई विवादों और गंभीर घटनाओं को लेकर सुर्खियों में रह चुकी है। जेल के भीतर गैंगवार, बंदियों के बीच मारपीट, नुकीली वस्तुओं से हमले और हिंसक झड़पों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। लेकिन अब जेल के अंदर हत्या की घटना ने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। इससे यह संदेश भी जा रहा है कि जेल की ऊंची दीवारें और सुरक्षा के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं।

मृतक नीलू जगत

आरोपी राजेश रॉय
यह घटना केवल एक बंदी की मौत भर नहीं है, बल्कि जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। यदि जेल के भीतर रह रहे कैदी भी सुरक्षित नहीं हैं, तो सुधार गृह की पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। मानसिक रूप से बीमार बंदियों की निगरानी, सुरक्षा और इलाज की व्यवस्थाओं पर भी अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।फिलहाल जिला पुलिस और फॉरेंसिक टीम मामले की जांच में जुटी हुई है। लेकिन इस हत्या ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जेल की दीवारों के पीछे भी सुरक्षा व्यवस्था लाचार नजर आ रही है।फिलहाल देखने वाली बात होगी कि पूरी जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी पहले की घटनाओं की तरह फाइलों में सिमट कर रह जाएगा।

