गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर परम पूज्य गहिरा गुरुदेव स्वामी जी की तपोभूमि श्रीकोट धाम में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य गुरुपूर्णिमा महोत्सव आयोजित किया गया। श्री सनातन संत समाज के अध्यक्ष परम आदरणीय श्री ऋषेश्वर महाराज जी के सान्निध्य में हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा, विद्यार्थी, शिक्षक और समाजजन शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु वंदना और पूजन-अर्चन के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने गहिरा गुरुदेव स्वामी जी के श्रीचरणों में पुष्प अर्पित कर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की। पूरे श्रीकोट धाम में भक्तिमय वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में गहिरा गुरुदेव स्वामी जी के तप, त्याग, सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए किए गए अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति तक धर्म, शिक्षा, सेवा और राष्ट्रीय चेतना का प्रकाश पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया। उनका जीवन आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इस दौरान गुरुदेव के संदेश “सत्य, शांति, दया और क्षमा को अपनाएं तथा चोरी, डकैती, हत्या और मिथ्या आचरण का त्याग करें” का स्मरण कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि यही जीवन-दर्शन समाज में नैतिकता, सदाचार, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का सबसे बड़ा मार्ग है।

युवाओं से भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और राष्ट्रभक्ति को जीवन में उतारने का आह्वान किया गया। विद्यार्थियों, शिक्षकों, संतजनों और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सत्य, सेवा, करुणा, सदाचार और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलने तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संकल्प लिया।

गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, आस्था और भारतीय सांस्कृतिक गौरव का अनुपम संगम बनकर संपन्न हुआ। आयोजन ने एक बार फिर गुरु-शिष्य परंपरा की महानता को जीवंत करते हुए यह संदेश दिया कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही समाज में नैतिकता, संस्कार और मानवता की ज्योति को सदैव प्रज्ज्वलित रखा जा सकता है।

