छत्तीसगढ़ :- भारतमाला परियोजना में मुआवजा राशि के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने मंगलवार को तीन लोकसेवकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने भूमाफियाओं के साथ मिलकर शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया। गिरफ्तार आरोपियों में तत्कालीन पटवारी नायकबांधा दिनेश पटेल, पटवारी टोकरो लेखराम देवांगन और पटवारी भेलवाडीह बसंती घृतलहरे शामिल हैं।
ब्यूरो में दर्ज अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत इन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7सी, 12 सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 468, 471, 420 और 120-बी के तहत कार्रवाई की गई है। जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच इन लोकसेवकों ने भारतमाला परियोजना रायपुर-विजाग आर्थिक कॉरिडोर के तहत अधिग्रहित भूमि में फर्जीवाड़ा किया।
आरोपियों ने सरकारी भूमि को पुनः शासन को ही विक्रय कर मुआवजा राशि दिलाई, साथ ही बैकडेट में बंटवारा और नामांतरण कर जाली दस्तावेज तैयार किए। कई मामलों में असली भू-स्वामी की जगह किसी अन्य व्यक्ति को मुआवजा दिया गया। इसके अलावा निजी भूमि को गलत तरीके से सरकारी परियोजना में शामिल कर उसके हिस्से बांटकर मुआवजा राशि हड़प ली गई।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन लोकसेवकों ने भूमाफियाओं और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर शासन के साथ धोखाधड़ी की और करोड़ों की राशि का गबन किया। तीनों आरोपी पद का दुरुपयोग कर दस्तावेजों में हेराफेरी करते रहे। इस मामले में पहले ही न्यायालय ने इनके खिलाफ वारंट और कुर्की की कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन गिरफ्तारी पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगी थी।
हाल ही में 28 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाई, जिसके बाद ईओडब्ल्यू ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया। इस प्रकरण में पहले ही 13 अक्टूबर को 10 आरोपियों, जिनमें 2 लोकसेवक शामिल हैं, के विरुद्ध पहला अभियोग पत्र दायर किया जा चुका है। अब फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जांच एजेंसी घोटाले की पूरी साजिश की परतें खोलने में जुटी है।
