बिलासपुर :- बिलासपुर में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही और मिलीभगत अब खुलकर सामने आने लगी है। तोरवा क्षेत्र स्थित कृषि उपज मंडी समिति बिलासपुर परिसर में लगे तीन विशालकाय सागौन के वृक्षों को अवैध रूप से काट दिया गया। यह वही वृक्ष थे जो वर्षों से परिसर की हरियाली और सौंदर्य बढ़ा रहे थे।सूत्रों के मुताबिक जुलाई 2025 में इन पेड़ों की अवैध कटाई की गई, जिसे खुद मंडी समिति के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया बताया जा रहा है। इस मामले की शिकायत वन विभाग को की गई है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने इसे “सरकारी संरक्षण में पेड़ माफिया की करतूत” बताया है।

वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं विभाग के कुछ अधिकारियों ने स्वीकार किया कि जमीन राजस्व विभाग से संबंधित है, इसलिए कार्रवाई की जिम्मेदारी राजस्व अधिकारियों की भी बनती है।जब इस संबंध में अतिरिक्त तहसीलदार आकाश गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि “यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था, लेकिन अब जांच कराई जाएगी।” हालांकि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की बात कही जा रही है, मगर अब तक दोषियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और नागरिक संगठनों ने इस घटना को गंभीर पर्यावरण अपराध बताया है। उनका कहना है कि जब राज्य सरकार खुद हरियाली बढ़ाने में करोड़ों खर्च कर रही है, तब सरकारी दफ्तरों के भीतर ही पेड़ों की अवैध कटाई होना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस प्रकरण में दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए।
