बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 25 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन महाबंद चक्का जाम शुरू कर दिया है। राजधानी से लेकर संभाग मुख्यालयों तक इसका असर देखने को मिल रहा है। महासंघ के बैनर तले प्रदेशभर के ड्राइवर एकजुट होकर सड़क पर उतरे हैं। उनका कहना है कि जब तक ड्राइवर सुरक्षा कानून लागू नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।
महासंघ ने इस चक्का जाम के ज़रिए ड्राइवरों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक अधिकारों को लेकर सरकार का ध्यान खींचा है। उनकी दस प्रमुख मांगों में ड्राइवर सुरक्षा कानून, वेलफेयर बोर्ड का गठन, राज्य में पूर्ण शराबबंदी, दुर्घटना में मृत्यु या विकलांगता पर मुआवजा, बच्चों के लिए शिक्षा आरक्षण, हेल्थ कार्ड और 55 वर्ष की आयु के बाद पेंशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं। संघ का कहना है कि सड़क पर जान जोखिम में डालने वाले ड्राइवर अब अपने हक के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं।

महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि “सुरक्षित ड्राइवर ही सुरक्षित परिवहन की गारंटी है।” उन्होंने सरकार से मांग की है कि ड्राइवरों के योगदान को सम्मान मिले और उनके लिए ठोस कल्याणकारी नीति बनाई जाए। साथ ही, शराबबंदी को लागू कर सड़कों पर बढ़ते हादसों पर लगाम लगाने की बात कही गई।
इस बीच, प्रशासन भी स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। ट्रैफिक एडिशनल एसपी रामगोपाल करियारे ने बताया कि जिला पुलिस ने वाहनों की सुगम आवाजाही और सुरक्षा को लेकर विशेष ड्यूटी लगाई है। उन्होंने बताया कि अब तक किसी भी स्थान पर वाहनों को रोकने जैसी स्थिति नहीं बनी और बिलासपुर सहित अन्य क्षेत्रों में यातायात सामान्य बना हुआ है।
महासंघ ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हर ड्राइवर के सम्मान और सुरक्षित जीवन के लिए है। उनका संदेश है शराब होगी बंद, तभी सुरक्षित होगा हर ड्राइवर का जीवन।
