बिलासपुर :- उत्तर भारत का प्रमुख पर्व छठ पूजा पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर रेलवे ने अपने स्टेशनों पर छठ गीतों और भजनों का प्रसारण शुरू किया है। लेकिन बिलासपुर सहित छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्टेशनों पर केवल बिहार और उत्तर प्रदेश के पारंपरिक गीत बजाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई है।
संस्कृति प्रेमियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा और त्यौहारों को रेलवे ने हमेशा नज़रअंदाज़ किया है। स्टेशन पर आज तक हरेली, तीजा, पोला या छत्तीसगढ़ महोत्सव जैसे स्थानीय पर्वों से जुड़े गीत कभी नहीं बजाए गए। वहीं अब छठ पूजा पर गैर-स्थानीय गीतों का प्रसारण कर रेलवे ने अपने क्षेत्रीय असंतुलन को और स्पष्ट कर दिया है।
लोगों का तर्क है कि स्टेशन केवल यात्रा का केंद्र नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान का प्रतीक भी होता है। ऐसे में अगर यहां किसी दूसरे राज्य की संस्कृति को जगह मिले और स्थानीय संस्कृति को मंच तक न मिले, तो यह सांस्कृतिक भेदभाव है। उनका कहना है कि यह रवैया प्रदेश की आत्मा को कमजोर करता है।
संस्कृति संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रेलवे प्रशासन से सवाल किया है कि आखिर क्यों हर साल छत्तीसगढ़ की आवाज़ दबा दी जाती है। उन्होंने मांग की है कि स्टेशन पर प्रदेश के लोकगीत, लोकभजन और पारंपरिक पर्वों से जुड़े गीतों का भी प्रसारण किया जाए, ताकि यात्रियों को छत्तीसगढ़ की पहचान महसूस हो।
देखें वीडियो
https://www.facebook.com/share/v/1CCyPW7rhH/
