बिलासपुर :- बिलासपुर में शनिवार की शाम तोरवा छठ घाट आस्था और श्रद्धा की रोशनी से जगमगा उठा। 2100 दीयों से सजी महाआरती में जब भक्तों ने सूर्य उपासना की, तो माहौल भावनाओं और भक्ति से सराबोर हो गया। अरपा के तट पर गूंजते भजनों और ‘छठ मइया के जयकारों’ ने पूरे क्षेत्र को पावन बना दिया।
महाआरती में शामिल श्रद्धालुओं ने घाट पर दीप प्रवाहित कर नदियों और पर्यावरण की शुद्धता का संदेश दिया। यह दृश्य न केवल धार्मिक था, बल्कि प्रकृति संरक्षण और सामाजिक एकता की मिसाल भी पेश कर रहा था। हर दीप में भक्ति की ज्योति थी और हर चेहरे पर आस्था की चमक।

मुख्य अतिथि बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि “अरपा हमारी जीवन रेखा है, इसे स्वच्छ रखना हर नागरिक का कर्तव्य है।” उन्होंने अरपा को प्रदूषणमुक्त बनाने के अभियान की शुरुआत की और कहा कि आने वाले समय में घाटों का सौंदर्य और बढ़ाया जाएगा।
नहाय-खाय के साथ छठ पर्व की विधिवत शुरुआत हुई। व्रतियों ने शुद्धता और संयम का पालन करते हुए दिनभर निर्जल रहकर स्नान-पूजन किया। श्रद्धा और तपस्या का यह आरंभ चार दिवसीय पर्व की सबसे पवित्र भूमिका बन गया।
भोर होते ही घाटों पर सफाई अभियान चलाया गया, ताकि छठ व्रतियों को किसी तरह की असुविधा न हो। नगर निगम के कर्मचारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय युवाओं ने मिलकर घाट को सजाने और साफ-सुथरा बनाने में अहम भूमिका निभाई।

इस अवसर पर सांसद अरुण साव, विधायक शैलेश पांडेय, तखतपुर विधायक रश्मि सिंह, पार्षदगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने दीपदान कर छठ मइया से सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की।
छठ महापर्व की महाआरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रही यह बिलासपुर की सामूहिक चेतना और आस्था का प्रतीक बन गई। अरपा किनारे जब दीपों की लौ हवा में डोल रही थी, तो ऐसा लगा मानो पूरा शहर श्रद्धा की रोशनी में नहाया हुआ हो।
भक्ति, प्रकृति और मानवता का संगम बनकर यह पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ गया। अगले दो दिनों तक घाटों पर व्रतियों की तपस्या, सूर्य को अर्घ्य और सामूहिक भावनाओं की यह धारा यूं ही प्रवाहित होती रहेगी।
