बेमेतरा :- जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल से रविवार को एक साथ 11 शिक्षिकाओं और एक आया को सेवा से हटा दिया गया। डीईओ कार्यालय में सभी को अचानक बुलाकर बर्खास्तगी आदेश सौंपा गया, जिसके बाद एक शिक्षिका सदमे में बेहोश हो गईं। इस अप्रत्याशित कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों के अनुसार, शिक्षिकाओं की नियुक्ति खनिज न्यास निधि (DMF Fund) के माध्यम से वर्ष 2022-23 में की गई थी। इन्हें मानदेय भी इसी फंड से दिया जा रहा था, लेकिन पिछले एक साल से कई को भुगतान नहीं मिला था। शिकायतों के बावजूद विभाग ने कोई समाधान नहीं निकाला और अब “फंड की कमी” का हवाला देकर सेवाएं समाप्त कर दीं।
![]()
फंड की कमी या मनमानी?
आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों के आधे से अधिक पद पहले से रिक्त हैं, बावजूद इसके अनुभवी शिक्षिकाओं को हटाने का निर्णय विभागीय तर्क पर सवाल खड़ा कर रहा है। प्रशासन पर पहले से ही DMF फंड के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं।
शिक्षिकाओं की व्यथा — “तीन साल की सेवा का ऐसा इनाम”
बेरला स्कूल की शिक्षिका वर्षा चौबे ने कहा, “हम तीन साल से पढ़ा रहे हैं, अब अचानक कहा गया कि फंड खत्म हो गया। हमसे बिना वेतन महीनों काम कराया गया और अब निकाल दिया गया।” वहीं बेमेतरा की सविता ने बताया, “सात महीने से वेतन नहीं मिला, अब बर्खास्तगी पत्र दे दिया गया।

विभाग का बचाव
डीईओ कार्यालय ने बयान जारी कर कहा, “शिक्षिकाएं नियमित कर्मचारी नहीं हैं। DMF और अन्य स्रोतों से भुगतान संभव नहीं हो पा रहा है, इसलिए सेवाएं समाप्त की गईं। जल्द नई नियुक्तियां की जाएंगी और बकाया मानदेय का भुगतान किया जाएगा।”
राजनीतिक आक्रोश — “फंड की गड़बड़ी छिपाने की कोशिश”
जिला कांग्रेस अध्यक्ष आशीष छाबड़ा ने इसे “अमानवीय कार्रवाई” बताया। उन्होंने कहा, “रविवार को बुलाकर शिक्षिकाओं को हटाना अपमानजनक है। विभाग DMF फंड में चल रही गड़बड़ियों को छिपा रहा है।”
रोटी-रोजी पर संकट
अचानक सेवा से अलग कर दी गई शिक्षिकाएं अब मानसिक और आर्थिक संकट में हैं। कई ने कहा कि विभाग ने उनकी मेहनत और निष्ठा की कोई कद्र नहीं की। अब उनके सामने परिवार चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
