बिलासपुर :- बिलासपुर रेल हादसे की जांच के दूसरे दिन कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) बी.के. मिश्रा की पूछताछ में रफ्तार बेहद धीमी रही। मंगलवार को घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के बाद बुधवार को पूछताछ का दौर चला, लेकिन पूरे 12 घंटे की कार्यवाही में सिर्फ 7 लोगों से ही बयान दर्ज हो पाए। जबकि सीआरएस ने 27 कर्मचारियों को तलब किया था। इनमें से दो वरिष्ठ अधिकारी,रशीराज और शैलेंद्र चंद्र,पूरी तरह गैरहाजिर रहे। अब जांच का तीसरा और अंतिम दिन बचा है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने कम वक्त में कैसे तय होगी हादसे की असली वजह।

जांच के दूसरे दिन सीआरएस मिश्रा ने हादसे की रात ड्यूटी पर रहे रेलवे के तकनीकी, सिग्नलिंग और मेडिकल स्टाफ से बयान दर्ज किए। सबसे पहले मेडिकल और रिलीफ टीम के सदस्यों से पूछा गया कि क्या हादसे के बाद राहत कार्यों में किसी तरह की देरी या बाधा आई थी। साथ ही यह भी जांचा गया कि क्या रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान किसी ने मौके के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की थी। सीआरएस ने स्पष्ट कहा कि हर तथ्य की पुष्टि फील्ड रिकॉर्ड और लॉग बुक के डेटा से की जाएगी।पूछताछ के लिए सुबह 9 बजे से ही कर्मचारियों को बुलाया गया था, लेकिन सीआरएस टीम के देर से पहुंचने और बयान प्रक्रिया लंबी होने के कारण कई अधिकारी शाम तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कई कर्मचारियों ने बताया कि वे सुबह से ही बुलाए गए थे, लेकिन रात तक पूछताछ नहीं हो पाई। इससे जांच की गति पर सवाल उठने लगे हैं।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक, सीआरएस की प्राथमिक जांच सूची में पहले 19 लोगों के नाम थे, जिन्हें बाद में बढ़ाकर 27 कर दिया गया। इनमें स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, सिग्नल इंस्पेक्टर, ट्रैक मेंटेनेंस स्टाफ, कंट्रोल रूम अधिकारी और राहत टीम के सदस्य शामिल हैं। लेकिन जिस तरह से दूसरे दिन केवल 7 लोगों से ही पूछताछ हो सकी, उससे साफ है कि पूरी जांच प्रक्रिया तय समय में पूरी होना मुश्किल है।
अब तीसरे दिन सीआरएस मिश्रा जोनल और मंडल स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ करेंगे। इसके बाद पूरी जांच रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर जिम्मेदारी तय होगी। लेकिन जिस रफ्तार से पूछताछ चल रही है, उससे यह स्पष्ट है कि तीन दिन की तय समयसीमा में जांच पूरी होना लगभग असंभव है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर अधिकारियों की गैरहाजिरी और धीमी प्रक्रिया जारी रही, तो क्या हादसे की असली वजह फिर कागज़ों में ही दबकर रह जाएगी?
