बिलासपुर :- बिलासपुर का 140 साल पुराना मिशन अस्पताल परिसर मंगलवार को आंसुओं, मलबे और आक्रोश का केंद्र बन गया। सुप्रीम कोर्ट से यथास्थिति का आदेश आने के बावजूद नगर निगम ने बुलडोज़र चलाकर दर्जनों मकान और हिस्से ध्वस्त कर दिए। कोर्ट की राहत की खबर जब तक लोगों तक पहुंची, तब तक कई परिवारों की छतें ढह चुकी थीं और उनकी यादें मलबे में समा गई थीं।जानकारी के अनुसार, मिशन अस्पताल की जमीन 1885 में लीज पर दी गई थी, जिसकी अवधि 2014 में समाप्त हो गई। लीज नवीनीकरण को लेकर ईसाई महिला मिशन बोर्ड और जिला प्रशासन के बीच वर्षों से विवाद चल रहा था। सोमवार को हाईकोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद निगम ने बिना देर किए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।

मिशन बोर्ड ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और राहत की मांग की। मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई करते हुए status quo बनाए रखने का आदेश दिया और यह भी कहा कि आदेश की प्रति तुरंत बिलासपुर कलेक्टर को भेजी जाए। लेकिन आदेश के कुछ घंटे बाद ही निगम ने कार्रवाई रोकने के बजाय चार से पांच बुलडोज़र लगाकर तोड़फोड़ और तेज कर दी।

पीड़ित अरशद हुसैन ने बताया कि दोपहर 12 बजे सुप्रीम कोर्ट का मौखिक आदेश मिल गया था, लेकिन प्रशासन ने इसे नजरअंदाज कर दिया। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग अपने घरों से सामान निकालने तक का वक्त नहीं पा सके। मलबे में बिखरे बाइबल के पन्ने और टूटे क्रॉस इस दर्द की गवाही दे रहे थे कि इंसानियत कभी-कभी फैसलों के शोर में दब जाती है।

बुधवार को इस कार्रवाई के खिलाफ मसीही समाज के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने प्रशासनिक अमानवीयता के खिलाफ नारेबाज़ी की और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना पर कड़ी नाराज़गी जताई। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दिनभर माहौल तनावपूर्ण बना रहा। अब कोर्ट के आदेश से उम्मीद जगी है कि कम से कम आगे की कार्रवाई रुकेगी, लेकिन जो उजड़ गया — उसकी भरपाई किसी आदेश से नहीं हो पाएगी।
