बिलासपुर :- बिलासपुर जोनल मुख्यालय के सभागार में बुधवार को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इस दौरान पीसीसीएम ने रेलवे की गैर-किराया राजस्व बढ़ाने से जुड़ी नई पहलों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि रेलवे अब केवल किराया वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्री सुविधाओं, व्यापारिक अवसरों और राजस्व सृजन को एक साथ मज़बूती से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।पीसीसीएम प्रवीण पांडेय ने बताया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे अपने स्टेशनों और परिसंपत्तियों को आधुनिक, जीवंत और आत्मनिर्भर केंद्रों में बदलने के मिशन पर काम कर रहा है। इसके तहत अमृत भारत स्टेशन योजना को सिटी सेंटर कॉन्सेप्ट के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इन स्टेशनों पर मल्टी-फंक्शनल वाणिज्यिक कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं, जहाँ यात्रियों को खुदरा बाजार, भोजनालय, कार्यालय और मनोरंजन की सुविधाएँ एक साथ मिलेंगी।उन्होंने बताया कि बिलासपुर मंडल के 18 स्टेशनों के लिए निवेशकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जा चुके हैं। वहीं, रेलवे की खाली पड़ी जमीनों और गुड्स शेड साइडिंग क्षेत्रों को लॉजिस्टिक और वेयरहाउसिंग हब के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रेलवे की गैर-किराया आय में बड़ी वृद्धि होगी।

प्रवीण पांडेय ने बताया कि रेलवे ने एकीकृत स्टेशन सुविधा प्रबंधन मॉडल अपनाया है, जिसके तहत सफाई, खानपान और पार्किंग जैसी सेवाओं का संचालन निजी एजेंसियों को सौंपा जा रहा है। हालांकि, रेलवे इन सभी व्यवस्थाओं पर सुरक्षा और संचालन का नियंत्रण स्वयं बनाए रखेगा। यह मॉडल फिलहाल बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग स्टेशनों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है।उन्होंने आगे बताया कि वन स्टेशन वन प्रोडक्ट योजना के तहत स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को अपने उत्पाद सीधे यात्रियों तक पहुँचाने का मंच दिया गया है।

वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 59 स्टेशनों पर 65 ओएसओपी स्टॉल संचालित हैं, जहाँ स्थानीय उत्पादों की बिक्री हो रही है।साथ ही ई-कैटरिंग और मॉड्यूलर फूड यूनिट्स के ज़रिए यात्रियों को स्वच्छ और क्षेत्रीय स्वाद का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।SECR के 14 स्टेशनों पर अब 357 ई-कैटरिंग पार्टनर सक्रिय हैं।पीसीसीएम प्रवीण पांडेय ने कहा कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की यह रणनीति प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के विज़न को आगे बढ़ाने का प्रयास है। अब स्टेशन केवल यात्रा का ठिकाना नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापार, संस्कृति और अवसरों का केंद्र बनेंगे जो रेलवे के राजस्व के साथ-साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति देंगे।
