बिलासपुर :- बिलासपुर शहर और आसपास के इलाकों के लिए यह एक सुखद लेकिन सोचने पर मजबूर करने वाली खबर है। जिले के जलाशयों के बाद अब प्रवासी पक्षियों की आमद शहरी क्षेत्र में भी देखने को मिल रही है। सोमवार को अरपा नदी के तट पर रपटा पुल के पास नदी के उथले हिस्से में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का झुंड नजर आया। यह दृश्य जहां प्रकृति प्रेमियों के लिए खुशी लेकर आया, वहीं इसके पीछे छिपी सच्चाई ने व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सवाल भी खड़े कर दिए।विडंबना यह है कि जिस अरपा नदी के किनारे ये खूबसूरत मेहमान पहुंचे हैं, उसी नदी में शहर के नालों का गंदा पानी बह रहा है। प्रदूषित जल के बीच ये पक्षी उथले हिस्सों में भोजन तलाशते दिखाई दिए। वर्तमान में बैराज निर्माण कार्य के चलते नदी में पानी कम है, जिससे भोजन की उपलब्धता तो बढ़ी है, लेकिन साफ पानी और सुरक्षित आवास का अभाव इन प्रवासी पक्षियों के लिए खतरे की घंटी भी है।

तस्वीरों में उथले पानी में भोजन खोजते ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट्स और पाइड एवोसेट बर्ड्स की तरह नजर आने वाली झुंड साफ दिखाई दे रहे हैं।हालांकि यह ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट या फिर पाइड एवोसेट बर्ड्स है या नही इसकी पुष्टि नही हुई है।बता दें कि अपने काले-सफेद शरीर, चमकीले गुलाबी पैरों और पतली सीधी चोंच के कारण बेहद आकर्षक जलपक्षी है, जबकि पाइड एवोसेट की पहचान उसकी लंबी टांगें और ऊपर की ओर मुड़ी हुई विशिष्ट चोंच है, जिससे वह पानी में अगल-बगल घुमाकर भोजन करता है। ये दोनों प्रजातियां छत्तीसगढ़ में शीतकालीन प्रवास पर आती हैं।फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी शायद वन विभाग तक को नहीं है। शासन-प्रशासन एक ओर प्रवासी और दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण के लिए रामसर जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के बड़े-बड़े स्थल विकसित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ये पक्षी प्रवासी हो या स्थानीय शहर के बीच प्रदूषित नदी में भोजन तलाशने को मजबूर हैं। नालों का गंदा पानी और निर्माण कार्य के बीच इनकी मौजूदगी एक विरोधाभासी तस्वीर पेश करती है।

संभवत प्रवासी पक्षियों का इस तरह शहरी क्षेत्र में दिखना इस बात का संकेत है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल बनाई जाएं तो अरपा नदी का यह हिस्सा भी इनके लिए संभावित आवास बन सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि प्रदूषण पर नियंत्रण हो, नदी की नियमित निगरानी की जाए और इन पक्षियों को सुरक्षित माहौल मिल सके।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रवासी पक्षियों की इस अप्रत्याशित आमद को लेकर वन विभाग और प्रशासन क्या पहल करता है। क्या अरपा नदी के इस हिस्से को संरक्षण क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा, या फिर ये मेहमान उपेक्षा के बीच लौट जाएंगे। प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी केवल एक खबर नहीं, बल्कि बिलासपुर शहर के लिए प्रकृति को सहेजने की एक बड़ी जिम्मेदारी और अवसर दोनों है।
