बिलासपुर :- ठंड बीत चुकी है और अब चिलचिलाती गर्मी दस्तक देने वाली है, लेकिन धरने पर बैठे गरीब परिवारों की पीड़ा जस की तस बनी हुई है। करीब दो महीने से महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे अपने घर बचाने की मांग को लेकर डटे हुए हैं, मगर अब तक न प्रशासन ने सुध ली है और न ही शासन की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है।धरना स्थल पर पहुंचे लोगों और समाजसेवकों का कहना है कि ताकतवरों और बड़ी कंपनियों के लिए जमीन आसानी से उपलब्ध करा दी जाती है, लेकिन गरीबों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है।

आरोप है कि हजारों एकड़ जमीन बड़े उद्योगपतियों को दी जा रही है, जबकि ये परिवार केवल अपने वर्षों पुराने घर और रोजी-रोटी को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।धरने पर बैठी महिलाओं ने साफ कहा कि वे किसी नई सुविधा या वैकल्पिक आवास की मांग नहीं कर रहीं, बल्कि उसी जगह पर शांति से रहने का अधिकार चाहती हैं, जहां उनकी दो-तीन पीढ़ियां पली-बढ़ी हैं। बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और पूरा जीवन इसी क्षेत्र से जुड़ा है, फिर भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। उनका स्पष्ट कहना है कि मांग पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।

वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल ने बताया कि धरना अब 60 दिन पार कर चुका है और जरूरत पड़ी तो यह 100 या 200 दिन तक भी चलेगा। उन्होंने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक लोग यहीं बैठे रहेंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि जैसे चुनाव के समय गरीबों के बीच जाकर वोट मांगे गए थे, वैसे ही अब उनकी पीड़ा भी सुनी जाए।

धरने एवं आंदोलन को समर्थन देने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व पूर्व उपसरपंच ब्रह्मदेव सिंह और राकेश सिंह धरना स्थल पर पहुंचे।उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और आंदोलन को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया।समाजसेवकों ने इसे आम जनता के साथ धोखा बताया। उनका कहना है कि गरीब मजदूरों ने भरोसा कर सरकार चुनी, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया गया। विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ना न्याय नहीं है, सरकार को अपने वादों पर खरा उतरना चाहिए।

कुल मिलाकर यह धरना अब केवल जमीन या मकान का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह गरीबों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की लड़ाई बन चुका है। कड़ाके की ठंड हो या आने वाली चिलचिलाती धूप महिलाओं का साफ ऐलान है कि वे हर परिस्थिति में धरने पर डटी रहेंगी और किसी भी दबाव में पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना है कि इसी स्थान पर अपना आवास वापस पाने की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा।
