बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने सराफा व्यापारियों के खिलाफ हो रही पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि अवैध और तथाकथित शिकायतों के आधार पर बिना जांच के की जा रही कार्रवाई से वर्षों से ईमानदारी से व्यापार कर रहे सराफा कारोबारियों की प्रतिष्ठा और आजीविका दोनों पर संकट खड़ा हो गया है।एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल सोनी ने इस संबंध में बिलासपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले मामले की विस्तृत, तथ्यात्मक और निष्पक्ष जांच की जाए। उनका कहना है कि बिना जांच सीधे कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है और इससे व्यापारिक माहौल खराब हो रहा है।

कमल सोनी ने बताया कि बिलासपुर शहर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में सराफा व्यापारी अपने परिचित ग्राहकों को सोने-चांदी के आभूषण गिरवी रखकर ऋण प्रदान करते हैं, जो पूरी तरह एक वैधानिक और स्थापित व्यावसायिक प्रक्रिया है। तय समय सीमा में यदि लेनदार ऋण और ब्याज नहीं चुकाता, तो नियमों के अनुसार गिरवी रखा आभूषण व्यापारी की संपत्ति माना जाता है।इसके बावजूद कुछ मामलों में लेनदार पुराने और निपट चुके मामलों को दोबारा उठाकर पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहे हैं। एसोसिएशन का आरोप है कि हाल के दिनों में सोने की कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी के कारण कुछ लोग अनुचित आर्थिक लाभ के उद्देश्य से व्यापारियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

एसोसिएशन का कहना है कि झूठी और भ्रामक शिकायतों के जरिए पुलिस को गुमराह किया जा रहा है, जिससे निर्दोष सराफा व्यापारियों को मानसिक तनाव, सामाजिक बदनामी और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। हाल ही में बिलासपुर के कुछ ज्वेलर्स के खिलाफ सामने आई शिकायतों को भी इसी प्रवृत्ति का उदाहरण बताया गया है।छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि किसी भी शिकायत पर कार्रवाई से पहले यह जांच अनिवार्य की जाए कि क्या लेनदार ने निर्धारित अवधि में ऋण चुकाने का प्रयास किया था या नहीं। एसोसिएशन ने भरोसा जताया कि निष्पक्ष जांच से ही न्याय संभव है और इससे व्यापारियों का विश्वास तथा कानून व्यवस्था दोनों मजबूत होंगी।
