बिलासपुर :- व्यापार विहार में कॉस्मेटिक संघ के अध्यक्ष सागर ट्रेडिंग कंपनी पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा की गई छापेमारी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नकली कॉस्मेटिक की शिकायतों के बाद की गई इस कार्रवाई को देखकर ऐसा लगा मानो विभाग ने मजबूरी में कदम उठाया हो, न कि जनता की सेहत की चिंता में।

छापेमारी के दौरान हेयर ऑयल सहित कई कॉस्मेटिक उत्पादों पर नकली होने का संदेह जताया गया और सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजने की औपचारिकता पूरी कर ली गई। लेकिन यही प्रक्रिया पहले भी कई बार अपनाई जा चुकी है, जिनका नतीजा आज तक सामने नहीं आया। सैंपल लिए गए, फाइलें बनीं और फिर सब कुछ फाइलों में दफन हो गया।

स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों का आरोप है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ कैमरों तक सीमित रहती है। जांच के नाम पर सैंपल तो उठा लिए जाते हैं, लेकिन न तो रिपोर्ट सार्वजनिक होती है और न ही दोषियों पर ठोस कार्रवाई नजर आती है। इससे विभाग की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब व्यापार विहार और जिले भर में नकली खाद्यान्न और कॉस्मेटिक की खुलेआम बिक्री की जानकारी विभाग को वर्षों से है, तो फिर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह लापरवाही है या फिर जानबूझकर आंख मूंद लेने का खेल?

आरोप यह भी हैं कि कई दुकानदारों को विभागीय संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि छापेमारी के बाद मामला “सेट” हो जाता है, दुकानदार बेखौफ रहते हैं और प्रशासन की जेबें गर्म होने की चर्चाएं आम हो जाती हैं। जनता की सेहत यहां सबसे पीछे छूट जाती है।

अब ड्रग इंस्पेक्टर सोनम जैन लैब रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का दावा कर रही हैं, लेकिन जनता का भरोसा पहले ही टूट चुका है। सवाल साफ है—क्या इस बार सच में नकली कॉस्मेटिक बेचने वालों पर गाज गिरेगी, या फिर यह कार्रवाई भी पिछली तरह सिर्फ एक और खानापूर्ति बनकर रह जाएगी?
