बिलासपुर :- मसीही समुदाय में आध्यात्मिक आत्मचिंतन और समर्पण का प्रतीक लेंट (उपवास काल) 18 फरवरी से आरंभ हो गया है। सुदेश पॉल ने बताया कि यह 40 दिनों का पवित्र समय प्रभु यीशु के क्रूस से पूर्व सहन किए गए दुखों और बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिसमें विश्वासी उपवास और प्रार्थना के माध्यम से अपने जीवन को ईश्वर के निकट लाने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने बताया कि यह उपवास काल 18 फरवरी से शुरू होकर 29 मार्च तक चलेगा। लेंट का संबंध बाइबल में बार-बार आने वाले 40 अंक से है, जो धैर्य, परीक्षा और आध्यात्मिक तैयारी का प्रतीक माना जाता है।धार्मिक परंपराओं के अनुसार बाइबल में जलप्रलय के दौरान 40 दिन-रात वर्षा, इस्राएलियों का 40 वर्षों का वनवास, मूसा और एलिय्याह का 40 दिनों का तप तथा प्रभु यीशु का जंगल में 40 दिन का उपवास—इन सभी घटनाओं से लेंट की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि जुड़ी हुई है।

चर्च में इन दिनों विशेष प्रार्थना सभाएँ आयोजित की जा रही हैं। पिछले 21 वर्षों से प्रतिदिन शाम को परिवारों में आराधना, भजन-कीर्तन और प्रवचन का आयोजन होता है, जहाँ क्वायर समूह भक्ति गीतों से वातावरण को आध्यात्मिक बना देता है।

लेंट के दौरान विश्वासी सांसारिक आकर्षणों से दूर रहकर बाइबल पाठ, प्रार्थना और आत्मपरीक्षण करते हैं। वे अपने व्यवहार को बेहतर बनाने, क्षमा मांगने और जरूरतमंदों की सहायता करने जैसे कार्यों के माध्यम से ईश्वर की इच्छा के अनुरूप जीवन जीने का संकल्प लेते हैं।

कार्यक्रमों के सफल संचालन में चर्च के अनेक सदस्यों और स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समुदाय के लोगों का कहना है कि यह 40 दिन केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, प्रेम और सेवा का संदेश देने वाला आध्यात्मिक उत्सव है।

