बिलासपुर :- बिलासपुर सिरगिट्टी औद्योगिक धेत्र का मित्तल फर्नीचर परिसर किसी औद्योगिक इकाई से अधिक एक सुनियोजित मौत का जाल निकला, जहां फर्नीचर की आड़ में ज्वलनशील केमिकल का अवैध भंडारण किया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि जिस कमरे में काम कराया जा रहा था, वहां 30 हजार लीटर तक तारपीन तेल भरा हुआ था—न खिड़की, न वेंटिलेशन और न ही दूसरा दरवाजा। मजदूरों को जानबूझकर ऐसे बंद कमरे में रखा गया, जो किसी भी पल विस्फोटक कक्ष में बदल सकता था।

हादसे के बाद जब मलबा हटाया गया तो फर्नीचर नाम मात्र का मिला, जबकि हर तरफ तारपीन की बोतलें, ड्रम, 50 लीटर के टिन और दो विशाल टंकियां मिलीं। सूत्रों के मुताबिक टंकियों में भी तारपीन भरा था। साफ है कि फैक्ट्री का असली कारोबार फर्नीचर नहीं, बल्कि ज्वलनशील रसायनों का भंडारण था, जिसे प्रशासन और विभागों की आंखों के सामने छिपाकर चलाया जा रहा था।

सबसे खौफनाक सच यह है कि जिस कमरे में आग लगी, वहां से बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था और उसी के सामने तारपीन से भरी टंकी खड़ी थी। आग लगते ही धुएं और लपटों ने उस रास्ते को बंद कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दो लोग किसी तरह बाहर भाग निकले, लेकिन एक मजदूर वहीं फंस गया और जिंदा जल गया—यह हादसा नहीं, सुरक्षा के नाम पर किया गया अपराध है।

मृतक के भाई ने बताया कि आग लगते ही वह भी बाहर भागा, लेकिन धुएं के कारण कुछ दिखना बंद हो गया। चीख-पुकार के बीच उसने महसूस किया कि उसका भाई पीछे रह गया है। कुछ ही मिनटों में पूरा कमरा धधक उठा और बचाव का कोई मौका नहीं बचा। फैक्ट्री प्रबंधन ने न तो आपात निकास बनाया और न ही अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम किए।

और भी गंभीर बात यह है कि फैक्ट्री फर्नीचर के नाम पर पंजीकृत है, जबकि औद्योगिक सुरक्षा जांच में यह एसएस केमिकल के नाम से रजिस्टर होने की जानकारी सामने आई है। सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में इतने सालों से केमिकल का यह खतरनाक खेल चल रहा था? क्या बिना अनुमति इतनी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ रखना नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है?

अब यह मामला सिर्फ एक फैक्ट्री हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सीधा आरोप है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे “बमघर” किसी और मजदूर की जिंदगी निगल सकते हैं। यह जांच नहीं, जिम्मेदारों पर हत्या का मामला बनना चाहिए—ताकि दोबारा किसी मजदूर को फर्नीचर की आड़ में मौत के हवाले न किया जा सके।
