बिलासपुर के व्यापार विहार स्थित ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल का विवाद अब और गहराता जा रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने सीबीएसई बोर्ड का हवाला देकर बच्चों का एडमिशन लिया और मोटी फीस वसूली, लेकिन परीक्षा के समय अचानक सीजी बोर्ड से परीक्षा कराने की बात सामने आ गई। इस मामले में जहां स्कूल प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था भी कटघरे में दिखाई दे रही है।

परिजनों का कहना है कि अगर स्कूल वास्तव में सीबीएसई से संबद्ध नहीं था, तो फिर इतने समय तक यह स्थिति कैसे बनी रही। उनका सवाल है कि आखिर जिला शिक्षा विभाग को इस पूरे मामले की जानकारी पहले क्यों नहीं हुई। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल लंबे समय से सीबीएसई का नाम लेकर एडमिशन और फीस वसूली कर रहा था, फिर भी जिम्मेदार विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।मामला तब और भड़क गया जब स्कूल प्रबंधन ने अचानक मैसेज भेजकर अलग-अलग कक्षाओं की परीक्षा कराने की सूचना दे दी। यह संदेश मिलते ही अभिभावकों में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग स्कूल पहुंच गए। गुस्साए परिजनों ने स्कूल परिसर में विरोध जताते हुए इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।

हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। लेकिन अभिभावकों का आक्रोश शांत नहीं हुआ और मामला थाने तक जा पहुंचा। परिजनों ने साफ कहा कि जब उन्होंने अपने बच्चों को सीबीएसई शिक्षा के भरोसे इस स्कूल में दाखिला दिलाया था, तो अब अचानक बोर्ड बदलना उनके साथ अन्याय है।

देर रात तक आक्रोशित अभिभावक कलेक्टर बंगले के बाहर डटे रहे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे। अब सबकी नजर प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर इस विवाद में क्या सच्चाई सामने आती है और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
देखें वीडियो
